भारत-जापान रिश्तों को नई रफ्तार देने का संदेश, टोक्यो में पीयूष गोयल ने कहा—इस दशक में दोगुनी हों जापानी कंपनियां
भारत और जापान के रिश्ते अब सिर्फ दोस्ती और कूटनीति तक सीमित नहीं रह गए हैं। दोनों देशों के बीच कारोबार, तकनीक, निवेश, विनिर्माण और रणनीतिक सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने टोक्यो में भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को लेकर बड़ा संदेश दिया है।
गोयल ने जापानी कारोबारी जगत से भारत में अपनी मौजूदगी और निवेश को और बढ़ाने की अपील की है। उनका खास लक्ष्य है कि इस दशक के दौरान भारत में काम कर रही जापानी कंपनियों की संख्या मौजूदा स्तर से दोगुनी हो।
टोक्यो से साफ संदेश—अब रिश्तों को कारोबार की रफ्तार चाहिए
पीयूष गोयल ने जापान-भारत बिजनेस कंसल्टेटिव कमेटी और जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के साथ हुई बैठक में कहा कि दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में अभी काफी संभावनाएं बाकी हैं।
यानी बात सिर्फ यह नहीं कि जापान भारत में निवेश करे, बल्कि दोनों देशों की कंपनियां मिलकर नए कारोबार, नई तकनीक और नए बाजार तैयार करें। गोयल ने बिजनेस-टू-बिजनेस सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया।
200 से ज्यादा कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ जापान पहुंचे गोयल
पीयूष गोयल 24 से 27 अगस्त तक जापान की यात्रा पर हैं। उनके साथ 200 से ज्यादा कारोबारी प्रतिनिधियों का एक बड़ा भारतीय प्रतिनिधिमंडल भी गया है। यह प्रतिनिधिमंडल विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, स्टील, ऑटोमोबाइल, वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करता है।
टोक्यो के बाद प्रतिनिधिमंडल नागोया और ओसाका भी जाएगा। मकसद साफ है—जापानी कंपनियों को भारत में निवेश और उत्पादन बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा अवसर दिखाना।
सेमीकंडक्टर से लेकर एआई तक, नए दौर की साझेदारी
भारत-जापान साझेदारी अब पारंपरिक कारोबार से आगे निकलकर सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, अगली पीढ़ी की मोबिलिटी और आपूर्ति शृंखला जैसे क्षेत्रों तक पहुंच रही है।
गोयल ने जापानी कंपनियों को भारत में अपने उत्पादन, अनुसंधान एवं विकास और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का विस्तार करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
भारत के लिए यह इसलिए भी अहम है क्योंकि देश हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
जापानी कंपनियों के लिए भारत क्यों खास?
गोयल ने जापानी निवेशकों के सामने भारत को एक भरोसेमंद और तेजी से बढ़ते बाजार के रूप में पेश किया। उनका कहना है कि भारत का बड़ा घरेलू बाजार, आर्थिक विकास और अलग-अलग देशों के साथ व्यापार समझौते जापानी कंपनियों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद कर सकते हैं।
इसके साथ ही भारत सरकार हाई-टेक विनिर्माण से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर भी काम कर रही है। सेमीकंडक्टर और ऑटो कंपोनेंट उद्योग से जुड़ी कुछ चिंताओं को दूर करने के लिए नियमों में बदलाव की बात भी सामने आई है।
सिर्फ निवेश नहीं, भारत में स्थानीयकरण पर भी जोर
पीयूष गोयल ने जापानी कंपनियों से भारत में लोकलाइजेशन यानी स्थानीय स्तर पर उत्पादन और सोर्सिंग बढ़ाने का आग्रह किया है।
उनका संदेश यह है कि अगर जापानी कंपनियां भारत में बड़ा बाजार देख रही हैं, तो उन्हें भारत में उत्पादन, शोध, रोजगारऔर स्थानीय सप्लाई चेन को भी मजबूत करना चाहिए। स्टील जैसे क्षेत्रों में भी उन्होंने जापानी कंपनियों को भारतीय उत्पादकों से अधिक खरीदारी करने के लिए प्रोत्साहित किया।
2026 क्यों है खास?
भारत और जापान ने 2026 को ‘भारत-जापान साझा क्षितिज वर्ष’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। यह दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ से जुड़ा विशेष अवसर है। ऐसे में गोयल की जापान यात्रा आर्थिक रिश्तों को अगले चरण में ले जाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
आगे का रास्ता क्या?
पीयूष गोयल का संदेश मोटे तौर पर यही है कि भारत-जापान साझेदारी में अब अगला अध्याय बड़े पैमाने पर निवेश, तकनीकी सहयोग और संयुक्त उत्पादन का होना चाहिए।
जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत का विशाल बाजार, युवा कार्यबल तथा बढ़ता विनिर्माण आधार—अगर ये दोनों ताकतें साथ आती हैं, तो आने वाले वर्षों में रिश्तों का आर्थिक पक्ष और मजबूत हो सकता है।
कुल मिलाकर, टोक्यो से पीयूष गोयल का संदेश सिर्फ जापानी कंपनियों को भारत में निवेश का न्योता नहीं है, बल्कि भारत-जापान साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाने का रोडमैप भी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले वर्षों में कितनी नई कंपनियां भारत आती हैं और मौजूदा जापानी कंपनियां यहां अपना कारोबार कितना बढ़ाती हैं।
