दिल्ली में ज़ेप्टो ने बसा दी ‘सियोल स्ट्रीट’ और अब अगली बारी ‘एनिमे इंडिया’ की है — पर बॉस, असली फैंस तो सालों पहले ही वहां पहुंच चुके थे!

आजकल अगर आप इंस्टाग्राम या यूट्यूब खोलें, तो हर दूसरी रील में या तो कोई तीखे कोरियन रामेन नूडल्स सुड़कता दिखेगा या फिर अपने पसंदीदा एनिमे कैरेक्टर की तरह कॉसप्ले करता नज़र आएगा। भारत के युवाओं में कोरियन वेव (के-वेव) और जापानी एनिमे का बुखार सिर चढ़कर बोल रहा है। अब जब जनता वहां है, तो भला बड़ी-बड़ी कंपनियां और ब्रांड्स पीछे कैसे रहते?

हाल ही में १० मिनट में सामान डिलीवर करने वाले ऐप ज़ेप्टो ने दिल्ली में पूरी की पूरी ‘सियोल स्ट्रीट’ बसा दी। वहीं दूसरी तरफ, नवंबर में हैदराबाद के अंदर एनिमे इंडिया का महाकुंभ लगने जा रहा है। लेकिन मज़े की बात यह है कि जिस फैनडम के पीछे ब्रांड्स आज भाग रहे हैं, भारत के कट्टर फैंस तो वहां सालों पहले ही अपना डेरा जमा चुके थे! आइए, ज़रा तसल्ली से समझते हैं कि आखिर यह पूरा खेल क्या है।

दिल्ली में ज़ेप्टो की ‘सियोल स्ट्रीट’: सिर्फ़ ३०० मेहमान, पर शोर पूरे देश में!

ज़रा सोचिए, दिल्ली की सड़कों के बीचों-बीच अचानक दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल का नज़ारा दिखने लगे तो कैसा लगेगा? ज़ेप्टो ने अक्टूबर २०२६ में दिल्ली में ‘सियोल स्ट्रीट’ नाम का एक खास ‘इनवाइट-ओनली’ (सिर्फ़ न्योते पर आधारित) पॉप-अप इवेंट आयोजित किया। इसमें करीब ३०० चुनिंदा मेहमानों और कंटेंट क्रिएटर्स को बुलाया गया था।

इस इवेंट में खाने-पीने से लेकर गेम्स और म्यूज़िक तक, हर चीज़ में कोरियन तड़का था:

● नोंगशिम इंडिया का कस्टमाइज़्ड रामेन ज़ोन

● स्प्राइट का तीखा स्पाइस चैलेंज

● शेफिन, गिमी गिमी, मकेन और विकेडगुड का धमाल

आखिर ३०० लोगों की पार्टी से करोड़ों तक कैसे पहुंचा ज़ेप्टो?

अब आपके मन में सवाल आएगा कि सिर्फ़ ३०० लोगों को बुलाकर ज़ेप्टो को क्या मिला? असल में, यही ज़ेप्टो की सबसे चतुर चाल है, जिसे कंपनी के चीफ ब्रांड ऑफिसर चंदन मेंदीरत्ता ‘स्नोबॉलिंग द फैनडम’ (यानी पहले से मौजूद दीवानगी को और बड़ा बनाना) और ‘कल्चर हैकिंग’ कहते है।

 चंदन मेंदीरत्ता का फंडा एकदम साफ़ है:

“फैनडम तो पहले से मौजूद है। क्या हम इसे और बड़ा बना सकते हैं? बात सिर्फ़ वहां आने वाले ३०० लोगों की नहीं है, बात इस पर है कि वहां कौन आता है और कौन उस इवेंट की चर्चा को बाहर तक फैलाता है।”

इससे पहले भी ज़ेप्टो ने ‘फेक शादी’, ‘नानी का घर’ और ‘वैलेंटाइन्स प्रॉम नाइट‘ जैसे अनोखे इवेंट्स किए थे, जो हमारी पुरानी यादों से जुड़े थे। लेकिन ‘सियोल स्ट्रीट’ के ज़रिए ज़ेप्टो ने सीधे कोरियन पॉप कल्चर के फैंस को साधा है। इससे पहले ओरियो ने बीटीएस के साथ, टू यम! ने वरुण धवन के साथ ‘कोरियन करारे’ लॉन्च करके, बिंगो! ने डांस चैलेंज के ज़रिए और नॉर ने नेटफ्लिक्स के ‘स्क्विड गेम’ के साथ मिलकर विज्ञापन बनाए थे। लेकिन वे सिर्फ़ विज्ञापन थे—ज़ेप्टो खुद मेज़बान बन गया!

एनिमे इंडिया और कॉमिक कॉन: जहां ३०० नहीं, लाखों फैंस की भीड़ उमड़ती है!

ज़ेप्टो तो इस मैदान में अभी उतरा है, लेकिन भारत में पॉप कल्चर और एनिमे के असली खिलाड़ी तो सालों से मैदान संभाले हुए हैं। कॉमिक कॉन इंडिया की शुरुआत फरवरी २०११ में दिल्ली से हुई थी, जब वहां २०,००० लोग आए थे। २०१३ तक यह संख्या ५०,००० पहुंची और २०२५ में दिल्ली कॉमिक कॉन में ५२,००० से ज़्यादा फैंस जुटे। लेकिन अब असली धमाका नए शहरों में हो रहा है—जयपुर और कोच्चि में २०,००० से ज़्यादा, चेन्नई में ४५,००० से ज़्यादा और विशाखापत्तनम(विज़ाग) में १२,००० से ज़्यादा फैंस ने टिकट खरीदकर हिस्सा लिया।

जेब का पैसा बनाम सोशल मीडिया का ध्यान: असली बाज़ी कौन मारेगा?

दोनों मॉडल्स में ज़मीन-आसमान का फ़र्क है। एक तरफ कॉमिक कॉन और एनिमे इंडिया हैं, जहां फैंस अपनी जेब से पैसे खर्च करके टिकट खरीदते हैं और अपने पसंदीदा एनिमे डायरेक्टर की एक झलक पाने के लिए घंटों लंबी लाइन में खड़े रहते हैं। दूसरी तरफ ज़ेप्टो का मॉडल है, जहां मुफ़्त न्योते बांटे जाते हैं, ब्रांड्स पैसा लगाते हैं और क्रिएटर्स रील्स के ज़रिए लोगों का ध्यान खींचते हैं।

 एक मॉडल में फैंस की मेहनत का पैसा और गहरा जज़्बा लगा है, तो दूसरे में सिर्फ़ सोशल मीडिया का ध्यान। और आज के स्मार्ट फैंस यह बहुत जल्दी भांप लेते हैं कि कौन सा ब्रांड सच में उनकी पसंद की कद्र करता है और कौन सिर्फ़ दिखावे के लिए कॉस्ट्यूम पहनकर मार्केटिंग कर रहा है।

ज़ेप्टो अगला इवेंट किस फैनडम पर करेगा, यह तो अभी राज़ है—लेकिन इतना तय है कि १४ नवंबर को हैदराबाद में हज़ारों एनिमे फैंस की कतारें फिर लगने वाली हैं, और ब्रांड्स को आखिरकार वहीं जाना पड़ेगा जहां असली फैंस सालों पहले पहुंच चुके हैं!